सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

माईक्रोनेशिया - संयुक्त द्वीपराष्ट्र

दक्षिण पेसिफिक महासागर और उत्तर पेसिफिक महासागरकि मध्य मेँ लगभग एक लाख सात हजारकि जनसंख्या के साथ मिक्रोनेशिया राष्ट्र आता है । इसकी सबसे बड़ा सहर कोलोनियामेँ 9,9०० व्यक्ति रहते है और इसकी राजधानी पालिकीरकि जनसंख्या है कुल 5,771 । 10 मई 1979 को इसे विदेशी हुकुमत से स्वतंत्रता मिली थी !मिक्रोनेशिया का राष्ट्रिय गीत एक शिक्षिका नेँ लिखा है वो है इमी मुकीन्डा । इमी मुकीन्डा, स्कुल मेँ पढ़ाने के साथ साथ एम्रोडोरी व बालककोँ संभालने जैसे विषयोँ पर शाम को शीखाति थी । देशवासीओँ को इस द्वीपदेश को स्वर्ग से भी सुंदर बनाने आह्वान करते हुए उन्होने अपनी भावना व्यक्त कि है । Micronesia नाम दो ग्रीक शब्दोँ के मिलन से हुआ है mikrós/"small"/ छोटा +,nēsos/ "island"/द्वीप ) पश्चिमी पासेफिक या प्रशांत महासागर मेँ स्थित यह देश एक द्वीप देश है । माईक्रोनेशिया के पूर्व मेँ आता है और एक द्वीपदेश Polynesia तथा दक्षिण मेँ Melanesia । माईक्रोनेशिया को 6 sovereign देशोँ मेँ बाँटागया है
1.Micronesia
2.Kiribati
3.Marshall Islands
4.Nauru,
5. Palau,
6. तीन अमरीकी अधिकृत द्वीप
Guam,Northern Marianas, andWake Island.

सभी स्वतन्त्र राष्ट्र है अतएब इन क्षेत्रोँ मेँ संयुक्त नियम लागु होता है ।
पश्चिमी सभ्यता का माईक्रोनेशिया से परिचय पहलीवार 1521 मेँ हुआ जब Ferdinand Magellan यहाँ से होते हुए गुजरे थे । कहाजाता है कि Jules Dumont d'Urville नेँ 1832 इसे माईक्रोनेशिया नामदिया , परंतु इसके विरोध मेँ कहाजाता है कि Domeny de Rienzi नेँ उनसे पहले माईक्रोनेशिया नाम सुझाया था ।Micronesia कुल 2100 छोटेबड़े द्वीपोँ को लेकर बना है । क्षेत्रफल 2,700 वर्ग किलोमिटर (1,000 sq mi), और इन द्वीपोँ मेँ सबसे बड़ा है Guam 582 वर्ग km (225 sq mi) क्षेत्रफल के साथ । ये पुरा क्षेत्र चार द्वीपसमुह से बना हुआ है ,
1.theCaroline Islands, 2.theGilbert Islands, 3.Mariana Islands, 4.Marshall Islands.

बुधवार, 21 जनवरी 2015

इतिहास को लेकर बादविवाद करना गलत है....

इंग्लन्ड मेँ एक महान ऐतिहासिक हुए थे एडमंड़ वर्क ! वो सारा विश्व का इतिहास लिखरहे थे वो भी लगातार 30 वर्षोँ से ....
पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उन्होने अपनी जीवनभर कि जमा पुँजी इस ऐतिहासिक ग्रन्थ को आग के हवाले कर दिया !!!!!
घटना बड़ेबड़े ऐतिहासिक घटनाओँ से छोटी थी जिसे मि. एडमंड संकलित कर रहे थे !
दरसल उनके घर के पिछे एक व्यक्ति का कत्ल हो गया व अपराधी भी मौके पर पकड़ागया । घर के वाहर शोर सुन एडमंड भी वहाँ पहचँगये और लोगोँ से कत्ल का वजह पुछने लगे । वहाँ मौजुद लोगोँ ने अलग अलग कारण बताया ,सभी के मन्तव्य मेँ विरोधाभाष को देख मि. एडमंड घर मेँ लौटगये और ऐतिहासिक को आग मेँ जलाकर राख करदिया ।
उन्होने संभवतः सोचा होगा कि ताजा घटना मेँ जब सत्य सामने होने पर भी लोग एकराय बनानहीँ पाये तो मेँ तो संपूर्ण मानवजाति पर एक ग्रन्थ लिखरहा हुँ इसे नि:स्पक्ष होनाहोगा न कि एकतरफा !!!!!!
इतिहास संपूर्ण सत्य नहीँ होता परंतु यह अतीत को याद रखने का एक आधार है । इतिहास को लेकर वादविवाद करने से अछा होगा हम उससे सबक लेँ कि आगे इसतरह कि गलती फिर न हो क्युँ कि याद रहे इतिहास खुदको दौहराता है ।

बुधवार, 18 जून 2014

हैकर्स से सावधान !

✏ आजकल हैकर्स सोशल नेटवर्किंग ✉ साइट के खाते हैक करने के बाद उस खातों का इस्तेमाल अश्लील फोटो व वीडियो अपलोड में कर रहे हैं।
हैकर किसी जानकारी को गलत तरीके से भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अनवांटेड स्पैम एप्लीशन ✳ के जरिए हैकर्स आसानी से किसी भी अकाउंट को हैक कर सकते हैं। हैकर्स पहले किसी एप्लीकेशन का लिंक भेजता है और उस लिंक पर जैसे ही यूजर्स क्लिक करता है पासवर्ड 〽 की जानकारी उन तक पहुंच जाती है। खाता हैक होने के बाद इसका उपयोग हैकर्स गलत तरीके से कर सकता है। अकाउंट को हैक करने के बाद हैकरों ने एक ऐसा लिंक या फिर वीडियो, फोटो ✨ खातों में छोड़ना शुरू कर दिया है जिसे क्लिक करने वाले के प्रोफाइल में भी वह लिंक आ जाता है। इस तरह यह सिलसिला दिन-ब-दिन दूसरे खातों में बढ़ता चला जा रहा है। बढ़ते सोशल नेटवर्क ने जहां एक ओर कम्युनिकेशन को बढ़ाया है, वहीं इन्हीं सोशल साइट्स के जरिए हैकर्स के द्वारा इंटरनेट ✴ यूजर्स के कंप्यूटर्स हैकिंग में भी इजाफा हुआ है। इसी तरह की मुश्किलों का बीते दिनों मेँ भारतीयोँ को भी सामना करना पड़ रहा है।
हैकर्स द्वारा देश के फेसबुक तथा अन्या सोश्याल नेटवर्कींग साईटस यूजर्स को अनजान ट्रोजन हॉर्स लिंक भेजे जा रहे हैं। इन पर क्लिक करने वाले के पीसी से जुड़ी पूरी जानकारी डायवर्ट होकर अनजान हैकर्स तक पहुंच रही हैं। हैकिगँ होनेँ से बचने के लिये
⭕ ➡अनवांटेड एप्लीकेशन को क्लिक न करें।
⭕ ➡कोई एप्लीकेशन के माध्यम से आपको लिंक भेज रहा है तो उस एप्लीकेशन को भूल कर एड न करें।
⭕ ➡साइटों पर फ्री में मिलने वाले वायरस या फिर सॉफ्टवेयर लोड न करें।
⭕ ➡किसी के खाते में अश्लील फोटो या वीडियो है तो उसे नहीं खोलें।
⭕ ➡अपने पासवर्ड को गोपनीय रखें व खाता खोलने के लिए साइबर कैफे के इस्तेमाल से बचें।

रविवार, 20 अप्रैल 2014

ये भी भुला दिये जायेगेँ ....

लेपटोप और स्मार्टफोन तथा टेवलेट के वजह से डेस्कटॉप प्रड़ोक्ट्स कि मांग कम हुई हे । आज भी कुछ अफिस और प्राय घरोँ मेँ डेस्कटॉप कंम्प्युटर का ही इस्तेमाल होता है और ये ट्रेन्ड सायद चार पांच साल चलगे । नये कोम्प्युटर के आ जाने से आज भले कोई डेस्कटॉप को प्राधान्य न दे रहा हो परंतु एक वक्त था जब कोम्प्युर मतलब डेस्कटॉप को ही माना जाता था । डेस्कटॉप ही कोम्प्युटर की प्रारभं है पर क्युँ की अब नये टेक्नोलोजी नेँ डेस्कटॉप को लोकप्रियता मेँ पछाड़ दिया हे लगता हे बहुत जल्द इसकी भी टाईपराईटर जैसा हाल होगा । लोगोँ को अब कोम्प्युटर पर जॉबवर्क, पेजमेकींग या डेटाएन्ट्री की वर्क करना हे तो वो लेपटोप का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हे ।
जेनीथ जैसे कंपनीओँ ने डेस्कटॉप के बदले मोबाईल पर इन्टरनेट ओपरेट करते लोगोँ को टार्गेट बनाकर प्रड़ोक्ट बनाने लगे है । डेस्कटॉप बनानेवाली कंपनी मोनीटर,सीपीयु आदि कंपनीओँ ने इसमेँ कुछ बदलाब करके मार्केट मेँ टिके रहने के लिये प्रयास किया था परंतु इन सबके बावजुद अब कहना पड़ेगा की शायद डेस्कटोप का सूरज डुबने वाला हे ।

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

गरबा के रंग बिन गुजरातीओँ के संग B-)

मोदी जी नेँ हाल ही मेँ India tv मेँ आये एक महिला के प्रश्न पर कहा था कि आप गुजरात मेँ अक्टोबर नभेम्बर मेँ आयेँ और देखियेगा रात के 1.00 बजे भी लड़कियाँ गरबा खेलते मिलेगेँ या अंधेरे सड़कोँ पर अकेली जाते हुए मिलेगेँ । मैनेँ गुजरात के 6 सहरोँ मेँ लगभग 8 साल बिताया और गरबा क्या हे ये मुझे अछी तरह से मालुम हे । आपको एक बात बता दुँ ,,, आप कभी गुजरात मेँ गरबा के समय जायेँ तो देखियेगा जहाँ जहाँ गरबा हो रहा होता है वहाँ सुरक्षा के लिये खास लोग डंडे लेकर मौजुद रहते है और हर नाके पर एक चौकिदार या पहरेदार मिलजायेगा जिसके पास बंदुक आदि रहता हे। वे कोई सरकारी लोग नहीँ उन कन्याओँ के भाई अथवा रिस्तेदार होतेँ है । मतलब अगर आपने गलति से भी गलति किया तो आपकि खैर नहीँ हाँ !:-O B-) ;-) ! गुजरात मेँ गरबा खेलाजाता है और आदिवासी भी इसतरह नाचते गाते और पीते पिलाते हे । आदिवासीओँ मेँ ज्यादातर विवाह इन नाचगानोँ मेँ तय होता हे ठिक उसी तरह गरबा मेँ भी लड़का लड़कि को पसंद करता हे और फिर कुछदिन बाद शादी ! अबतक आप ये पढ़कर गुजरातीओँ से जलने लगे होँगेँ कि यार हमारे यहाँ ऐसा होता तो मेँ भी एक आद लड़किओँ को आराम से पटा लेता :-P :-P :-D! ! ! गरबा मेँ झुमते लड़किओँ को देखने का मज्जा हि कुछ और है और इस अवसर का लुफ्त उठाने के लिये दुसरे राज्योँ से आये हुये मजदुर अकसर वहाँ जाते है जहाँ गरवा हो रहा होता हे , मुझे देखने से कोई परहेज नहीँ पर वो जिस अंदाज मेँ उन लड़किओँ देखते है जैसे कोई भुका सामने खाना देखकर होता हे । दुसरोँ के वहू वेटिओँ को देखकर अपने जिभ से लार टपकनेँ मेँ क्या फायदा बहतर होगा ये लोग भी इनके साथ हाथ से हाथ मिलाकर नाचेँ ;-) :-) ! गरबा मेँ नाचने के लिये गुजरातीओँ को कोई अभ्यास करने कि जरुरत हि नहीँ है क्युँ कि गुजरात मेँ हर किसी के शादी मेँ लोग गरबा करते है । जैसे वीर अपने मा के उदर से ही सिखके आते कि कैसे चक्रव्युह तोडना हे कैसे तलवार और घोड़ा चलना हे ठिक उसी प्रकार हर गुजराती अपने माता के गर्भ मेँ ही गरबा खेलखेल कर आखिर मेँ जन्म लेता हे :-O :-O :-P ! अब क्युँ आप लोगोँ नेँ गरबा के बारे मेँ इतना सब पढ़लिया हे आपको भी गरबा देखने का मन कर रहा होगा तो देर किस बात कि गुजरात आपको स्वागत करने के लिये चमकता हुआ तैयार है । :-P :-P B-)

रविवार, 6 अप्रैल 2014

सबसे बहतर था हेल्वेटीका फोन्ट (Helvetica font)

जो लोग इंटरनेट और कोम्प्युटर टेकनोलोजी के साथ जुडे है वो सभी हेल्वेटीका फ्रोन्ट का उपयोग कर चुके है और इसके वारे मेँ थोड़ा वहुत जानते होगेँ। लुफतान्सा,माइक्रोसोफट,टोयोटो,जीप, और 3 एम् मेँ एक सामान्य वात यह हे कि इन सभी कंपानीओँ ने हेल्वेटीका फोन्ट का उपयोग किया । फोन्ट एक प्रकार कि पहचान हे, जैसे माइक्रोसोफ्ट् - विन्डोज कि एरीयल फोन्ट हे , इसी तरह टाइम्स अखबार नेँ स्वयं कि टाइम्स रोमन फोन्ट डेवलोप किया था । सेरीफ फोन्ट, कोपरप्लेट, गोपीक और फोक्स रोमन फोन्ट आदि पश्चिम के देशोँ मेँ तैयार किया गया था परंतु जब हेल्वेटिका आया सब बदल गया क्युँ कि इसमेँ पूरव के आईडिया भी लगे हुए थे और ये दुसरे फोन्ट से वहतर था । यह हेल्वेटीका फोन्ट स्विजरलेँड मेँ तैयार किया गया था , 1957 मेँ मेक्स् मेडीनीगर और एडवर्ड हॉकमेन के आईडिया से हेल्वेटीका बना था । जबकि लाइनवाला टाइप मशीन आया तब समाचार संस्था किस तरह फोन्ट का इस्तेमाल करेगेँ ये आईडिया माईक पार्कर नेँ दिया था । 1960 मेँ लाइन टाइप के लिये हेल्वेटीका तैयार किया गया था । गुटनवर्ग कि क्रांति के वाद प्रिन्टीँग टेकनोलोजी मेँ और सुधार आया । जब दो दशक पहले डेस्कटॉप पव्लीशीँग शुरु हुआ तब कोम्प्युटर सेकडो फोन्ट के साथ बेचा जाता था । उनदिनोँ वहु उपयोगी फोन्ट बनाने के लिये माइक पार्कर नेँ कोओर्डीनेशन किया था , फोन्ट द्वारा कलर कोम्प्युनिकेशन को भी संभव बनाया था । एसियाइ देशो मेँ फोन्ट डेवलप करने मेँ चीन सबसे आगे था । भारत मेँ भी तामिलनाड़ु दुसरे राज्योँ से वहतर था ।

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

इंटरनेट का जन्मस्थान

29 Oct. 1969 मेँ इंटरनेट का जन्म हुआ था । इस दिन जिस जगह से मात्र 2 शब्दोँ वाला प्रथम इंटरनेट मेसेज भेजा गया वहाँ आजकल एक इंटरनेट लेवोरेटरी चल रहा हे । दो शब्दोँवाला मेसेज भेजने के वाद इंटरनेट ठप हो गया था । केलिफोर्निया युनिवर्सिटी के रुम नं. 3420 मेँ स्टाक नेँ 45 वर्ष पहले लोस एंजलस मेँ स्थित स्टेनफोर्ड युनिवर्सिटी स्टाफ के साथ कम्युनिकेशन किया था । इसमेँ SDS - Sigma 2 कम्प्युटर का इस्तेमाल किया गया था । रेफ्रीजरेटर आकार के मशीन नेँ प्रथम मेसेज स्टोर करके भेजा था । इस मशीन को इंटरनेट का जन्मस्थल कहेँ तो शायद ठिक रहेगा क्युँ कि इंटरनेट नेँ पहला श्वास यहाँ लिया था .। इंटरनेट कि आइडिया उन दिनोँ के कोम्प्युटर सायन्टीस्ट लीओनोर्ड क्लीनरॉक के मगज से आया था । जो प्रथम मेसेज ‘log in ’ था लेकिन 'न्द और ‘O’ भेजने के बाद सिस्टम ठप्प हो गया और एक घंटे बाद कोम्प्युटर फिर से चालु हो गया था । इसके बाद दोनोँ सेँटरोँ के बीच कायमी लिँक बनाया गया जिसे हम लोग आजकल इंटरफेस मेसेज कहते हे और डिसेम्बर 1969 तक ऐसे चार लिँक बनाया गया था ।